लोक कवि ईसुरी पर केंद्रित आयोजन कात ईसुरी बुंदेलखंड के लोक कवि की चौकड़िया मात्र मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि सामाजिक उत्थान वेदना और विरह संवेदना की अभिव्यक्ति का मूलाधार है _श्री विनोद मिश्र

लोक कवि ईसुरी पर केंद्रित आयोजन कात ईसुरी बुंदेलखंड के लोक कवि की चौकड़िया मात्र मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि सामाजिक उत्थान वेदना और विरह संवेदना की अभिव्यक्ति का मूलाधार है _श्री विनोद मिश्र

लोक कवि ईसुरी पर केंद्रित आयोजन कात ईसुरी बुंदेलखंड के लोक कवि की चौकड़िया मात्र मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि सामाजिक उत्थान वेदना और विरह संवेदना की अभिव्यक्ति का मूलाधार है उनकी चौकड़ियों को आज मैंने एक नया रूप देकर उन रसिक श्रोताओं के समक्ष रखा है जो ईसुरी के मूल भाव को समझते हैं जिला पुरातत्व पर्यटन और संस्कृति परिषद सागर द्वारा आयोजित रविंद्र भवन में कहत ईसुरी कार्यक्रम में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देने आए दतिया मध्य प्रदेश से बुंदेली और ईश्वरी की चौकड़ियों के गायक विनोद मिश्र सुरमणि ने अपनी प्रस्तुति के दौरान उक्त बात कही उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ऐसी नानी लगत बुंदेली जैसे नार नवेली ,संस्कृत की बिटिया है जा वृज की परम सहेली से की। बुंदेली की मिठास उसके लालित्य को इस चौकड़िया के माध्यम से प्रस्तुत किया गया वहीं बुंदेलखंड की महिमा का वर्णन उन्होंने छंद के माध्यम से किया। कहत ईश्वरी के अंतर्गत विनोद मिश्र ने पहली प्रस्तुति ष् जो तुम छैल छला हो जाते परे अंगुरियां राते। मौ पौछत गालन से लगते कजरा देत दिखाते , का जैसे ही गायन किया रविंद्र भवन में उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहवर्धन करते हुए तालिया की घनघनाहट की। इसके बाद उन्होंने ईसुरी की चौकड़ीया ष्जब से भई प्रीत की पीड़ा,सुखी नहीं जो जियरा , कूरा माटी भव फ़िरत है इते उते मन हीरा ष् का गायन करते हुए विनोद मिश्र सुरमणि ने ईसुरी की चौकड़ियों को गालिब की गजल के बराबर खड़ा कर दिया आगे गायन करते हुए कहा ष्लागी की दवा कराएं कीसै,वेद हार गए जीसै ओर अखियां जब काहू से लगती ,सब सब रातन जगती ष् विरह वेदना की अभिव्यक्ति को श्री मिश्र ने लोकसंस्कृति के माध्यम और लोक रागों का सहारा लिया । ईसुरी की चौकड़िया हमखो लेव यार ओली में ,प्राण बसे बोली मेंष् के साथ ही चलती बेर नजर भर हेरो, मन भर जावे मेरो मिला लेव आंखन से आँखें घूंघट तनक उगेरो ष्का गायन किया । सभी श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर संगीत की सुर लहरियों का आनंद लेते नजर आए ।विनोद मिश्र ने अपनी प्रस्तुति का समापन दतिया की पारम्परिक लेद गाकर किया। संगत कार कलाकारों में ऋतुरंग मिश्र, हरनाम कुशवाहा, राहुल दुबे, डैनी ने मधुरतम संगति की। इस अवसर पर उपस्थित रहें कलाकारों का स्वागत सम्मान एडीएम श्री रूपेश उपाध्याय आदि ने किया।

इस अवसर पर डॉ सरोज गुप्ता प्राचार्या, राजेंद्र दुबे श्री पंकज तिवारी श्री आशीष द्विवेदी वरिष्ठ कलाकार, विनीता बोहरे, मयंक तिवारी, श्री अखिलेश मिश्रा श्री अमित मिश्रा सुश्री खुशबू पटेल मुकेश पटेल सहित बड़ी संख्या में जन समुदाय मौजूद था।

संकलन  #सागर जनसमर्क

Manoj Goswami