क्या न करें-
1. घर में सेवा पूजा करने वाले जन भगवान के एक से अधिक स्वरूप की सेवा पूजा कर सकते हैं
2. घर के मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित ना करें और दो शिवलिंग की पूजा ना करें
3. घर में गणेश जी की मूर्ति दो से ज्यादा स्थापित ना करें
4. घर में शालिग्राम जी की मूर्ति सबसे छोटी से छोटी रखें और एक ही मूर्ति रखें जो ज्यादा छोटी मूर्ति रखेगा उतना ही फलदाई होगी
5. घर के मंदिर में कोई भी मूर्ति रखें तो चार अंगुल से बढी़ नही होनी चाहिए अगर चार अंगुल से बड़ी कोई मूर्ति घर में रखता है तो वह अशुभ होती है यह वास्तु दोष के खिलाफ होती है
6. कुशा की पबित्री के अभाव में सोने की अंगूठी धारण करके भी देव पूजा कार्य संपन्न किया जा सकता है
7. मंगल कार्यों में कुमकुम का तिलक होना अनिवार्य है और यह शुभ भी होता
8. पूजा पाठ में चावल के टूटे हुए टुकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि पूजा पाठ में टूटे हुए चावल अशुभ माने जाते हैं
9. पानी दूध दही घी आदी में अंगुली नहीं डालना चाहिए इन्हें लूटा या चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग नहीं रहती हैं
10. तांबे के पात्र में दूध दही घी पंचामृत को कभी नहीं रखना चाहिए क्योंकि यह वस्तुएं मदिरा के समान हो जाती है यह वस्तुओं को तांबे के पात्र में न कभी रखनी चाहिएऔर न कभी डालनी चाहिए
11. आचमन तीन बार करने का विधान है और इससे त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश प्रसन्न होते हैं
12. दाहिने कान का स्पर्श करने से आसमान के बराबर ही माना जाता है
13. कुशा के अग्रभाग से देवताओं पर जल नहीं छिड़कें
14. देवताओं को अंगूठे से नहीं मलें
14. चकले या पत्थर पर से कभी भी चंदन न लगावे उसे छोटी कटोरी में या बांयी हथेली पर रख कर लगावे
15. पुस्प को बाल्टी या लोटा व जल में डालकर के पुनः निकाल कर के फिर नहीं चढ़ाना चाहिए
16. सभी भगवान के चरणों की चार बार नाभि की और दो बार मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर के समस्त अंगों की सात बार आरती उतारे
17. सभी भगवान की आरती समय अनुसार जो घंटा, नगाड़े, झांझर, मंजीरा, थाली ,घड़ावल,शंख, इत्यादि बजते हैऔर उनकी ध्वनि से आसपास के वायु मण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते है नाद ब्रह्मा होता है नाद के समय एक स्वर से जो प्रति ध्वनि होती है उसमें असीम शक्ति होती है
18.लोहे के पात्र से सभी श्री भगवान को नैवेध अर्पण नहीं करें
19.हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें
20.समिधा हांथ से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए
21. छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित है
22. पंखे आदि से कभी भी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें
23. सुमेरु हीन माला या मेरू का उलंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए
24. माला ,रूद्राक्ष, तुलसी, चन्दन, कमलगट्टा, की उत्तम मानी गई है
25.माला को अनामिका यानि(तीसरी अंगुली)पर रख कर मध्यमा यानी (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए
26.जप करते समय या पूजन करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें
27. तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए
28. माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए
29. ब्राह्मण को या द्विजातियों को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए
30. जप करते हुए व जल में स्नान करते हुए और दौड़ते हुए व शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को कभी भी नमस्कार नहीं करना चाहिए क्योंकि वर्जित हैं
31. बिना नमस्कार किए आशीर्वाद नहीं देना चाहिए क्योंकि वर्जित हैं
32. एक हाथ से प्रणाम या नमस्कार नहीं करना चाहिए
33. सोए हुए व्यक्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए
34. बड़ो को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें
35. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए इसे उपांशु जप कहते है इसका फल सौगुणा फलदायक होता है इस विधि से जप करने से शीघ्र फल मिलता है
36. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रख ना चाहिए
37. जप के बाद आसन के नीचे की भूमि पर जल छोड़ कर उस जल को स्पर्श करैं ऊँ शकराय ऊँ इन्द्राय कह कर नेत्रों से लगाना चाहिए
38. संक्रान्ति ,द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और संध्या के समय तुलसी तोड़ना निषेध है यानि मना है
39. दीपक से दीपक को नहीं जलाना चाहिए
40. यज्ञ श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए सफेद तिल का नहीं
41. शनिबार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए और पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए और सभी दिन सुभ है लेकिन शनिवार को परिक्रमा करना श्रेष्ठ है किन्तु रविवार को परिक्रमा नहीं करनी चाहिए
42. कूमड़ो ,नारियल आदि को स्त्रियों को नहीं तोड़ना चाहिए और न स्त्रियां तोड़ें और चाकू आदि से नहीं काटें यह उत्तम नहीं माना गया है
43. भोजन ,प्रसाद, पूजा पाठ की सामग्री को कभी भी लाघंना नहीं चाहिए
44. देव प्रतिमा को देख कर अवश्य प्रणाम करना चाहिए
45. किसी भी व्यक्ति को कोई भी वस्तु या सामग्री व दान-दक्षिणा देवे तो दाहिने हाथ से ही देना चाहिए
46. एकादशी, अमावस्या, कृष्ण-चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत, श्राद्ध,पूजा- पाठ अनुष्ठान के दिनों में क्षौर -कर्म यानी नाखून काटना,बाल काटना,डाड़ी नहीं बन बाना चाहिए
47. सभी ब्राह्मणों व सभी क्षत्रियोंऔर सभी वैश्यों को बिना यज्ञोपबीत और बिना शिखा बंधन के जो भी कार्यक्रम और अनुष्ठान नहीं करना चाहिए जो भी सुभ कार्य किया जाता है वह निष्फल हो जाता है
48. यदि जिस व्यक्ति के शिखा नहीं हो तो वह व्यक्ति शिखा के स्थान की जगह को स्पर्श कर लेना चाहिए
49. भगवान शंकर की जलहरी को हमेशा उत्तर दिशा में रखना चाहिए
50. भगवान शंकर जी को शमी पत्र और वेल पत्र व तुलसी की बाल ,अर्क के फूल ,धतूरा और विष्णु जी को तुलसी ,गणेश जी को दूर्वा,लक्ष्मी जी को कमल का फूल ,दुर्गा जी को गुड़ेल का फूल व नीवू प्रिय है
51. शंकर जी को शिवरात्रि के शिवाय कभी भी कुमकुम नहीं चड़ाना चाहिए केवल तांत्रिक विधि में केवल शंकर को कुमकुम चढ़ाई जाती है
52. शिव जी को कुंद ,विष्णु जी को धतूरा, देवि जी को आक(मदार) और सूर्य जी को तगर के फूल कभी भी नहीं चढ़ाना चाहिए
53. चाबल देवताओं को बिना धोये हुये तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ाने चाहिए
54. वेल पत्र और शमी पत्र अगर नये न मिले तो पुराने से पुराने व चड़े हुये भी धोकर चढ़ाये जा सकते है
55. विष्णु जी को चाबल , गणेश जी को तुलसी , दुर्गा जी और सूर्य नारायण जी को विल पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए
56. वेल पत्र को उलटा व पुष्प को सीधा मुख नीचे करके नहीं चड़ाना चाहिए और किसी फूल को चढ़ाएं तो उसकी डंडी अपनी ओर करके चढ़ाएँ येसे ही चड़ाना चाहिए
57. किन्तु वेल पत्र उल्टा करके और डंडी को न तोड़ कर शंकर पर चढ़ाना चाहिए
58. पान के दोनों भागों को तोड़ कर यानी पान का डंठल व नोक को तोड़ना चाहिए
59. सड़ा हुआ पान या सड़ा हुआ पुष्प नहीं चढ़ाना चाहिए
60. गणेश जी को तुलसी केवल भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चढ़ाई जाती है
61. पांच रात्रि तक का कमल फूल बासी नहीं माना जाता हैं
62. दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होती है
63. सभी धार्मिक कार्यों में पत्नी को दाहिने भाग यानी दाहिने हाथ पर बिठाकर धार्मिक क्रियाओं को सम्पन्न करना चाहिए
64. पूजन करने बाले के ललाट पर तिलक लगा होना चाहिए तिलक लगाकर ही पूजा करना चाहिए
🌺65. पूर्वाभिमुख और उत्तराभिमुख बैठकर पूजा व अनुष्ठान करना चाहिए
🌺66. पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा ,धूप तथा दाहिनी ओर शंख ,जलपात्र एवं सभी पूजन सामग्री को रखना चाहिए
67. घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता के दायनी ओर रखें एवं चाबल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करना चाहिए ।

