देश का एक मात्र तांत्रिक शक्तिपीठ : जहाँ नही पड़ता किसी भी ग्रहण का प्रभाव, ग्रहणकाल में भी मां पीताम्बरा देती है भक्तों को दर्शन
चंद्रग्रहण के चलते मन्दिरो में होते रहे भजनकीर्तन
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दतिया। देश के तांत्रिक शक्तिपीठ की बात की जाए तो दतिया की तांत्रिक शक्तिपीठ पीताम्बरा मन्दिर का नाम आता है। जहां यह मंदिर बहुत से रहस्य अपने आप में समेटे हुए है। जिसमे एक रहस्य यह भी है कि माँ पीताम्बरा मन्दिर पर ब्रह्मण्ड में होने वाली खगोलीय घटना के कारण पड़ने वाले ग्रहणकाल का दोष इस मन्दिर पर नही पड़ता है। ग्रहण काल में देश के सभी मंदिरों में पट संभवतः बंद रहते हैं और मोक्ष प्राप्त होने यानि ग्रहण खत्म होने के बाद ही पट खुलते हैं, लेकिन विश्व भर में विख्यात दतिया के पीताम्बरा पीठ पर ग्रहण काल में भी पट बंद नहीं होते हैं। यहां ग्रहण काल में भी श्रद्धालुओं को मां बगलामुखी देवी के दर्शन होते रहते हैं।
सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, ग्रहण काल में सभी मंदिरों में पट बंद रहते हैं और जब ग्रहण खत्म हो जाता तब ही मंदिर के पट खुलते हैं लेकिन विश्व विख्यात दतिया के पीताम्बरा पीठ पर परंपरा बिलकुल अलग है। यहां पर माई के पट बंद नहीं होते हैं। यहां ग्रहण काल में भी श्रद्धालुओं को मां बगलामुखी देवी के दर्शन होते रहते हैं। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि पीठ के संस्थापक पीठाधीश्वर स्वामीजी महाराज ने पीताम्बरा माई की स्थापना की थी और तब से ही मंदिर में ग्रहण काल में माई के पट कभी बंद नहीं होते थे। ग्रहण काल में माई के दर्शन होने से श्रद्धालु भी काफी खुश रहते हैं और काफी तादाद में बाहर से भी श्रद्धालु दर्शन को पीठ पर आते हैं और कुछ श्रद्धालु परिसर में बैठकर भजन करते हैं। पीताम्बरा पीठ पर मां बगलामुखी देवी साक्षात बिराजमान है और दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण कर देती हैं। लोगों का मानना है कि ब्रम्हांड को चलाने वाली शक्ति पर ग्रहण का क्या प्रभाव पड़ेगा बल्कि जो भक्त ग्रहण काल में माई के दर्शन करेगा उस पर भी ग्रहण का कोई अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा।
*चंद्रग्रहण काल में मंदिरों में होते रहे भजनकीर्तन*
मालूम हो मंगलवार के दिन चन्द्रग्रहण के चलते सूतक काल सुबह नो बजे शुरू हो गया था। चन्द्रग्रहण में सूतक नो घण्टे पहले लग जाता है। इसके बाद 4 बजकर 20 चन्द्रग्रहण शुरू हो गया था जो करीब 6 बजकर 20 मिनट पर समाप्त हुआ। चन्द्रग्रहण के दौरान सभी देवी मंदिर एवं देव स्थानों पर पट बंद कर भजनकीर्तन होते रहे। चन्द्रग्रहण समाप्त होने के बाद देवी स्थानों पर पूजा अर्चना कर मंदिर के पट पुनः खोले गए।
*इनका कहना है*
पीतांबरा मन्दिर से जुड़े पंडित चंद्र मोहन दीक्षित आचार्य जी ने बताया है कि ग्रहणकाल के दौरान देश भर के मन्दिर बंद रहते है लेकिन पीताम्बरा पीठ के संस्थापक श्री स्वामी जी महाराज की आज्ञा के अनुसार एकमात्र पीताम्बरा मन्दिर में पूजा अर्चना चलती रहती और माई के दर्शन होते रहते है। किसी भी ग्रहण काल का पीताम्बरा मन्दिर पर प्रभाव नही पड़ता है।

