नवजात बालिका को संरक्षण प्रदान करने हेतु सीडब्लूसी के आदेश से महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा

नवजात बालिका को संरक्षण प्रदान करने हेतु सीडब्लूसी के आदेश से महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा

दतिया 13 नवम्बर 2025/ विगत माह पुलिस थाना सेवढा अंतर्गत ग्राम दरियापुर में एक नवजात शिशु बालिका लावारिस अवस्था में वहां की एक दंपत्ति को उनके घर के सामने मिलने की सूचना प्राप्त हुई। जिसके बाद उन्होंने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। मामला जिले के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने पर महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी श्री हरनौद शर्मा तथा सुपरवाइजर श्रीमती साधना गुप्ता ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नवजात बालिका को अपने संरक्षण में लिया । बालिका की हालत खराब होने से तत्कारल बाल कल्यातण समिति एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास को सूचित करते हुए जिला चिकित्सा लय के नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती कराया गया। बालिका की देखभाल एसएनसीयू में पदस्थ स्टॉफ, नर्सों एवं उनकी टीम द्वारा निरंतर की गयी।

बालिका के स्वास्थ्य लाभ प्राप्ते होने के उपरांत आज बालिका को एसएनसीयू में पदस्थ समस्त मेडीकल स्टॉफ, बाल कल्यााण समिति की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा गया। अब नवजात बालिका विभाग अंतर्गत संचालित रोशनी शिशुग्रह में रहेगी। जब नवजात बालिका को संरक्षण प्रदान करने हेतु सीडब्लूसी के आदेश से महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा जा रहा था तो एसएनसीयू में पदस्था मेडीकल स्टॉफ की ऑंखे नम थी। इस अवसर पर सिविल सर्जन डाँ के0 सी0 राठौर द्वारा बताया गया कि हमारे वार्ड में पदस्थ चिकित्सक डॉं. जगराम मांझी, डॉं. दिनेश तोमर, डॉं. प्रदीप उपाध्यांय, डॉं. राजेश पटेल, डॉं. देवराज सिंह, एवं नर्सिंग इंचार्ज प्रमोद कुमारी, सपना प्रजापति, हिना एवं हेमा, योगिता श्रीवास्तेव समस्त स्टाफ के द्वारा की गई सतत् चिकित्सीपय देखभाल एवं सेवाभाव के कारण नवजात बालिका की जान बचायी जा सकी। जिसके कारण वे सभी धन्यसवाद के पात्र हैं। बालिका को किसी प्रकार की समस्यां होने पर तत्काकल जिला चिकित्सालय के डॉंक्टरों से संपर्क किया जा सकता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविन्द कुमार उपाध्यासय द्वारा अपील की गयी कि कोई परिजन अपने बच्चों को ऐसे ही कहीं इधर उधर न छोडें वे बच्चों को जिला चिकित्सालय एवं खण्ड स्तारीय चिकित्सानलयों में लगाये गये पालना में छोड सकते हैं, ताकि बच्चों का जीवन सुरक्षित रहे। नवजात को सीधे जिला बाल संरक्षण इकाई के कार्यालय में भी सौंपा जा सकता है। सौंपने वाले का नाम गोपनीय रखा जायेगा। बाल कल्या्ण समिति अध्यक्ष श्रीमती कल्पना बैस द्वारा इस प्रकार बच्चों को सड़क एवं झाडियों में छोडने की बढती घटनाओं के संबंध में चिंता व्यक्त की एवं सुरक्षित सुपुर्दगी की कार्यवाही करने हेतु आवाहन किया।

इस मौके पर बाल कल्या्ण समिति की अध्याक्ष श्रीमती कल्पना राजे बैस एवं समिति के पदाधिकारी श्री संतोष तिवारी, श्री रामजीशरण राय, श्रीमती कृष्णाण कुशवाह, एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से बाल संरक्षण अधिकारी धीर सिंह कुशवाह तथा रोशनी शिशु गृह से संदेश शर्मा एवं स्टाफ उपस्थित रहे।

Manoj Goswami