श्री पीतांबरा पीठ की पूजा-परंपरा व ट्रस्ट की गतिविधियों में कोई हस्तक्षेप नहीं – कलेक्टर*
कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट किया है कि श्री पीतांबरा पीठ के संचालन हेतु गठित “प्रबंधन सहयोग एवं पर्यवेक्षण समिति” का उद्देश्य केवल मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाना है। समिति का ट्रस्ट की धार्मिक, आध्यात्मिक या परंपरागत गतिविधियों तथा पूजा-पाठ में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।
कलेक्टर ने बताया कि श्री पीतांबरा पीठ का संचालन एवं देखरेख विधिवत रूप से ट्रस्ट द्वारा की जा रही है, जिसका गठन एवं पंजीयन सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया गया है। समिति का गठन मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम, 1951 की धारा 22 एवं 23 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार किया गया है, ताकि प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से व्यवस्थागत सुधारों में सहयोग दिया जा सके।
दिनांक 19.11.2025 को मंदिर परिसर के एक नव-निर्मित भाग में हुई संरचनात्मक क्षति की घटना के पश्चात यह आवश्यकता विशेष रूप से अनुभव की गई कि मंदिर परिसर में निर्माण-सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था, अनुशासन, अभिलेख संधारण, वित्तीय पारदर्शिता तथा दर्शनार्थियों की सुरक्षा जैसे विषयों पर समन्वित सुझाव दिए जाएँ।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि समिति न तो यह तय करेगी कि ट्रस्ट कहाँ या क्या निर्माण कराए, और न ही ट्रस्ट के अधिकारों में कोई दखल देगी। समिति का दायित्व केवल यह है कि यदि कोई निर्माण या व्यवस्था विकसित की जा रही हो, तो उसमें सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता और श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा जा सके। साथ ही, मंदिर परिसर में सक्रिय दलाली, अव्यवस्था या श्रद्धालुओं के शोषण जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु व्यवहारिक सुझाव दिए जा सकें।
पूजा-पाठ, अनुष्ठान एवं धार्मिक क्रियाएँ पीठ की स्थापित परंपरा और विधान के अनुसार ही यथावत चलेंगी। समिति पुजारियों, पंडितों एवं सेवकों के साथ समन्वय बनाकर केवल बाहरी व्यवस्थागत सुधारों से संबंधित सुझाव तैयार कर ट्रस्ट को अवगत कराएगी।
कलेक्टर श्री वानखड़े ने श्रद्धालुओं एवं आमजन से अपील की है कि समिति को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम न फैलाएँ और न ही अफवाहों पर विश्वास करें। शासन और प्रशासन का उद्देश्य मंदिर की आस्था, परंपरा या स्वायत्तता में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सम्मानजनक दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

